Monday, 17 April 2017

मासिक धर्म से जुड़े मिथ, जानिए क्या है हकीकत || Myths related to menstru...

***मासिक धर्म से जुड़े मिथ, जानिए क्या है हकीकत***


 
यूं तो हर महिला को युवावस्था में ही मासिक धर्म शुरू हो जाता है लेकिन महिलाओं में माहवारी को लेकर कई मिथ रहते हैं। आइए, जानें मासिक धर्म (माहवारी) से जुड़े सबसे आम मिथ और उनके सच के बारे में।

मिथ- 1: मासिक रक्तस्राव गन्दा होता है।
मासिक धर्म होने का अर्थ है की लड़की या महिला अस्वच्छ हैं।

सत्य
शरीर से मासिक रक्तस्राव होना सामान्य है। यह गर्भाशय की परत के टूटने के कारण होता है।
मासिक धर्म, शरीर के गर्भावस्था के लिए तैयार होने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है न की शरीर से गन्दा या दूषित रक्त का निकालना। मासिक धर्म के बारे में कुछ भी गन्दा नहीं होता है।
अतः इस बात का कोई चिकित्सीय कारण नहीं है की आप स्कूल या किसी धार्मिक समारोह में नहीं जा सकती हैं या व्यायाम नहीं कर सकती हैं। सच्चाई तो यह है की ठीक समय पर मासिक धर्म होना आपके एक स्वस्थ व्यक्ति होने का संकेत है।
मिथ- 2: मासिक रक्तस्राव में बहुत रक्त का क्षय होता है। 
 
मिथ- 2: मासिक रक्तस्राव में बहुत रक्त का क्षय होता है।

सत्य
ऐसा महसूस हो सकता है या दिख सकता है की बहुत रक्त निकल रहा है पर ऐसा होता नहीं है।
ज़्यादातर महिलाओं में एक बार के मासिक रक्तस्राव में 2 से 6 चम्मच तक रक्त निकलता है। बाकी जो दिखता है वह गर्भाशय (यूट्रस) की परत के ऊतक होते हैं।

मिथ- 3: यदि मासिक धर्म नहीं हुआ तो आप गर्भवती हैं।

सत्य
किसी किशोरी का मासिक धर्म सामान्य होने में कुछ वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में मासिक धर्म का न होना सामान्य हो सकता है। इसका सिर्फ़ यही अर्थ नहीं होता की आप गर्भवती हैं।

बेशक, यदि किसी लड़की ने असुरक्षित सेक्स किया हो और उनका मासिक धर्म न हो तो वे गर्भवती हो सकती हैं। ऐसे में गर्भावस्था की जाँच करवाना अच्छा विचार होगा।
मिथ- 4: मासिक धर्म के समय सेक्स करना अस्वास्थ्यकर होता है। 
 

मिथ- 4: मासिक धर्म के समय सेक्स करना अस्वास्थ्यकर होता है।

सत्य
मासिक धर्म के समय सेक्स करने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, इस बात का कोई चिकित्सीय कारण नहीं है। पर यदि कोई आप असुरक्षित सेक्स करती हैं तो यौन संचारित रोग (सेक्सुअली ट्रान्समिटेड डिज़ीज़) हो सकता है।

मिथ- 5: यदि मासिक धर्म हो रहा हो तो आप गर्भवती नहीं हो सकती हैं।

सत्य
यह सत्य है की मासिक धर्म के दौरान सेक्स करने से गर्भावस्था की संभावनाएँ कम होती हैं। पर इसकी कोई गारंटी नहीं है। मासिक धर्म होने का अर्थ है की गर्भाशय की परत टूट कर बाहर निकल रही है पर इसका यह अर्थ नहीं है की कोई डिम्ब परिपक्व होकर शुक्राणु का इंतज़ार नहीं कर रहा है।

कुछ अन्य तथ्य:
सिक धर्म का अर्थ है, लगभग एक महीने में एक बार योनि से रक्तस्राव होता है। यह 4 से 6 दिनों तक होता है। ज़्यादातर लड़कियों में मासिक धर्म 11 से 16 वर्ष की आयु के बीच शुरु हो जाता है। तनाव, नियमित भारी व्यायाम या लम्बी बीमारी के कारण मासिक धर्म शुरु होने में देरी हो सकती है।


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Thursday, 13 April 2017

इन्हें ताकत की दवा समझने की भूल कभी न करें
• पुरुषों की यह गलती संतान को देती है मोटापा 
• बाजार में चाट खाएं मगर धनिया के पत्ते न डलवाएं 
• चर्बी घटाने के लिए जरूर करें डाइट में यह बदलाव 
शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से चलें, इसके लिए शरीर को विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। कैंसर और दिल की बीमारियों समेत यह कई तकलीफों से हमें बचाए रखते हैं। 

अगर हमारे भोजन में कई किस्मों के हेल्दी फूड हों, तो शरीर की विटामिन और मिनरल की जरूरत पूरी हो जाती है। लेकिन ज्यादातर लोग ताकत की दवा समझकर बिना किसी परामर्श के मल्टी-विटामिन का सेवन करते हैं, जो कि गलत है। 

शरीर में कुछ खास लक्षणों के आधार पर डॉक्टर विटामिन की दवा लेने के लिए परामर्श देते हैं। आमतौर पर पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन लेने पर शरीर में विटामिन और मिनरल की जरूरत अपने आप पूरी हो जाती है।

डायग्नोसिस के समय शरीर के विशेष अंगों में प्रभाव देखने पर ही डॉक्टर आयरन, फॉलिक एसिड और बी-12 जैसे विटामिन का सेवन करने का परामर्श देते हैं। 

एनीमिया और नर्व्स में कमजोरी देखने पर बी-1, बी-2, बी-6 और बी-12 लेने का परामर्श दिया जाता है। हड्डियों में दर्द, लिगामेंट में कमी, फ्रेक्चर जैसी समस्याएं देखने पर मरीज को विटामिन-डी के सेवन का परामर्श देने के साथ यह भी बताया जाता है कि शरीर में विटामिन-डी अवशोषित कैसे हो। 

आंखों की रोशनी में कमी को विटामिन-ए की कमी से जोड़कर देखा जाता है। हमारे लिगामेंट, मसल्स के सही तरह से काम करने के लिए शरीर में विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में होना जरूरी है। इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में दर्द और मसूड़ों से खून आने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

प्रेगनेंसी की अवस्था में शरीर में कुछ तत्वों की कमी हो सकती है। कुछ रिसर्च में कहा गया है कि स्थान विशेष से ताल्लुक होने के कारण नॉन वेज डाइट नहीं लेने पर कुछ महिलाओं में बी-12 और फॉलिक एसिड की कमी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर इस कमी को पूरा करने के लिए दवाएं देते हैं। 


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Tuesday, 21 March 2017

लू लगने से मृत्यु क्यों होती है?

~लू लगने से मृत्यु क्यों होती है? ~
दिल्ली से आंध्रप्रदेश तक....सैकड़ो लोग लू लगने से मर रहे हैं।
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगो की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है।( बंद कर देता है )
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है ( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )
👉 स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव अगले 5 -7 दिनों मे एशिया के अधिकतर भूभाग को प्रभावित करेगा।
कृपया 12 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है।)
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।
किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
ठंडे पानी से नहाएं। मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।
हीट वेव कोई मजाक नही है।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।
जनहित मे इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें।

***एलोवेरा के स्वास्थ्यवर्धक फायदे***

~~~***एलोवेरा के स्वास्थ्यवर्धक फायदे***~~~~Click Here To Read Full
एलोवेरा जितना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है उतना ही आपके बालों और त्वचा के लिए भी। आइए जानें ऐलोवेरा का हमारे स्वास्थ्य पर कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है।
• 1
एलोवेरा के फायदे
एलोवेरा को घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एमीनो एसिड और 12 विटामिन भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह शरीर में खून की कमी को दूर करता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह जितना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है उतना ही आपके बालों और त्वचा के लिए भी। आइए जानें ऐलोवेरा का हमारे स्वास्थ्य पर कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है।
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• 2
सनबर्न से बचाएं
एलोवेरा का रस सनस्क्रीन का काम करता है। धूप में निकलने से पहले एलोवेरा का रस अच्छी तरह से अपनी त्वचा पर लगाने से सूरज की हानिकारक किरणें आपकी त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचा पातीं।
• 3
जलने या चोट में फायदेमंद
एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है। चोट लगने या जलने पर इसका जेल निकाल कर लगाने से आराम मिलता है। जलने के तुरन्त बाद इसके जेल को लगा लेने से छाले नहीं पड़ते और साथ ही जलन भी समाप्त हो जाती है।
• 4
वजन नियंत्रण में सहायक
अगर आप का वजन बढ़ रहा है और इसके कारण आप हमेशा आलस और थकान का अनुभव भी कर रहे हैं तो एलोवेरा जूस का सेवन करें। एलोवेरा जूस को नियमित रूप से पीने से आप भरपूर तंदुरुस्ती का अहसास करते है। इससे एनर्जी लेवल भी बढ़ता है और वजन नियंत्रित रहता है।
• 5
पाचन क्रिया बनाएं दुरूस्त
एलोवेरा जूस पीने से पेट की कई रोग दूर होते हैं। यह पाचन तंत्रिका को मजबूत बनाता है। इसके रोजाना उपयोग से अपच और कब्ज जैसी समस्या भी दूर रहती है। पेट में पैदा होने वाले अल्सर को भी यह ठीक करता है।
• 6
स्ट्रेच मार्क हटाए
मोटापे और प्रेगनेंसी के कारण हुए स्ट्रेच मार्क में भी एलोवेरा उपयोगी होता है। स्ट्रेच मार्क को हल्का करने के लिए रोज सुबह एलोवेरा जैल से मालिश करें । यह काफी हद तक आपके स्ट्रेच मार्क को कम कर देगा।
• 7
झुर्रियों से बचाव
झुर्रियों आपको समय से पहले बूढ़ा बना देती हैं इससे बचने के लिए रोजाना एलोवेरा जॅल से मालिश कीजिये। यह त्वचा को अंदर से मॉइश्चराइज करता है। इसका रस स्किन को टाइट बनाता है और इसमें मौजूद विटामिन सी और ई के कारण त्वचा हाइड्रेट भी बनी रहती है।
• 8
दिल की बीमारी में फायदेमंद
एलोवेरा शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाता है और साथ ही रक्त प्रवाह को भी सुचारू बनाये रखने में मदद करता है। एलोवेरा हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।
• 9
बालों की समस्याओं में उपयोगी
बालों के लिए एलोवेरा चमत्कारी रूप से असर दिखाता है। बालों संबंधी जितनी भी समस्याएं हैं एलोवेरा के प्रभाव से दूर हो जाती हैं जैसे- बालों का गिरना, रूखे बाल, बालों में डेंड्रफ आदि। हफ्ते में दो बार शैंपू करने से पहले चमेली, जोजोवा या नारियल तेल में एलोवेरा का यह रस मिलाकर अच्छी तरह से अपने बालों में लगाएं।
• 10
बढ़ाए त्वचा की चमक
एलोवेरा शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर की अंदर से सफाई करता है। जिससे त्वचा में चमक आती है तथा दाग-धब्बों से भी दूर होते है। इसके अलावा एलोवेरा के जैल को त्वचा पर लगाने से एक्जिमा, पिंपल और सिरोसिस की समस्या भी दूर होती है।
• 11
स्वस्थ और स्वच्छ दांत
एलोवेरा, मुंह और मसूड़ों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल से मसूड़ों की तकलीफ और ब्लड आना बंद होता है। साथ ही मुंह में अल्सर की बीमारी भी ठीक होती है। इसे आप अपने दांत के डॉक्टर के रूप में भी अपना सकते हैं।