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शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से चलें, इसके लिए शरीर को विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। कैंसर और दिल की बीमारियों समेत यह कई तकलीफों से हमें बचाए रखते हैं।
अगर हमारे भोजन में कई किस्मों के हेल्दी फूड हों, तो शरीर की विटामिन और मिनरल की जरूरत पूरी हो जाती है। लेकिन ज्यादातर लोग ताकत की दवा समझकर बिना किसी परामर्श के मल्टी-विटामिन का सेवन करते हैं, जो कि गलत है।
शरीर में कुछ खास लक्षणों के आधार पर डॉक्टर विटामिन की दवा लेने के लिए परामर्श देते हैं। आमतौर पर पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन लेने पर शरीर में विटामिन और मिनरल की जरूरत अपने आप पूरी हो जाती है।
डायग्नोसिस के समय शरीर के विशेष अंगों में प्रभाव देखने पर ही डॉक्टर आयरन, फॉलिक एसिड और बी-12 जैसे विटामिन का सेवन करने का परामर्श देते हैं।
एनीमिया और नर्व्स में कमजोरी देखने पर बी-1, बी-2, बी-6 और बी-12 लेने का परामर्श दिया जाता है। हड्डियों में दर्द, लिगामेंट में कमी, फ्रेक्चर जैसी समस्याएं देखने पर मरीज को विटामिन-डी के सेवन का परामर्श देने के साथ यह भी बताया जाता है कि शरीर में विटामिन-डी अवशोषित कैसे हो।
आंखों की रोशनी में कमी को विटामिन-ए की कमी से जोड़कर देखा जाता है। हमारे लिगामेंट, मसल्स के सही तरह से काम करने के लिए शरीर में विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में होना जरूरी है। इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में दर्द और मसूड़ों से खून आने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
प्रेगनेंसी की अवस्था में शरीर में कुछ तत्वों की कमी हो सकती है। कुछ रिसर्च में कहा गया है कि स्थान विशेष से ताल्लुक होने के कारण नॉन वेज डाइट नहीं लेने पर कुछ महिलाओं में बी-12 और फॉलिक एसिड की कमी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर इस कमी को पूरा करने के लिए दवाएं देते हैं।
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